सम्यक कृति को संस्कृती कहते हैं, आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज।
सम्यक कृति को संस्कृती कहते हैं, आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज। बांसवाड़ा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा विराजित हैं धर्म सभा में अपनी देशना में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उद्बोधन में बताया कि सम्यक कृति को संस्कृती कहते हैं, और जो संस्कृति को हम तक पहुंचाते हैं […]
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