अन्तर्मना उवाच* (16 जुलाई!)कभी कभी वक्त के साथ,* *सब ठीक नहीं..**बल्कि सब खत्म हो जाता है..!*
*अन्तर्मना उवाच* (16 जुलाई!)कभी कभी वक्त के साथ,* *सब ठीक नहीं..**बल्कि सब खत्म हो जाता है..!* *कभी कभी वक्त के साथ,* *सब ठीक नहीं..* *बल्कि सब खत्म हो जाता है..!* *जीवन पल-पल मिट रहा है। आयु का तेल देह के दीये में जलकर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।* अब तुम अपने जीवन के कल्याण और […]
Read More