आत्मचिंतन, संयम और साधना से ही होती है आत्मानुभूति की प्राप्ति : मुनि श्री निर्णयसागर महाराज 

आत्मचिंतन, संयम और साधना से ही होती है आत्मानुभूति की प्राप्ति : मुनि श्री निर्णयसागर महाराज  ‘विदिशा। श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर (स्टेशन जैन मंदिर), माधवगंज में आयोजित धर्मसभा में पाठशाला प्रणेता मुनि श्री 108 निर्णयसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य अपने शुद्ध आत्मस्वरूप की पहचान करना है। जब तक […]

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अहिंसा, तप, संयम,दया प्रीति रूपी धर्म से आत्मा से कर्म पृथक करने का पुरूषार्थ करेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

अहिंसा, तप, संयम,दया प्रीति रूपी धर्म से आत्मा से कर्म पृथक करने का पुरूषार्थ करेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा संघ सहित विराजित हैं खांदू कालोनी श्री श्रेयांसनाथ जिनालय में 1008 श्री शांति नाथ भगवान का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक श्रद्धा और भक्ति पूर्वक मनाया गया […]

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