वस्तु स्वरुप को स्वीकार करने का नाम ही सम्यक् ज्ञान है नियमसागर महाराज

वस्तु स्वरुप को स्वीकार करने का नाम ही सम्यक् ज्ञान है नियमसागर महाराज विदिशा वस्तु स्वरुप को स्वीकार करने का नाम ही सम्यक् ज्ञान है यह सम्यक् ज्ञान असत्य को स्वीकार नहीं करता इसलिये सदुपयोग की कोटी में आता है।”     उपरोक्त उदगार संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य एवं […]

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