श्रावकों का जीवन मन,वचन,और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल होता हैं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
श्रावकों का जीवन मन,वचन,और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल होता हैं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी निवाई 23 जनवरी (राजेश पंचोलिया) निवाई। केवलज्ञान लक्ष्मी से जैनधर्म विभूषित है।जैन धर्म के अंतर्गत सर्वोच्च सिद्ध अवस्था का मार्ग बतलाया गया है । अनंतानंत भव्य आत्माये इस मार्ग पर चलकर सिद्ध हुए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी […]
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