श्रावकों का जीवन मन,वचन,और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल होता हैं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

श्रावकों का जीवन मन,वचन,और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल होता हैं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी निवाई 23 जनवरी (राजेश पंचोलिया) निवाई।  केवलज्ञान लक्ष्मी से जैनधर्म विभूषित है।जैन धर्म के अंतर्गत सर्वोच्च सिद्ध अवस्था का मार्ग बतलाया गया है । अनंतानंत भव्य आत्माये इस मार्ग पर चलकर सिद्ध हुए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी […]

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मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित्त में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। देशभर से आए गुरुभक्तों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया। 

मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित्त में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। देशभर से आए गुरुभक्तों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया।    टोंक दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री ने अपने देशना में बताया कि भगवान […]

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