मन अपने संबंध में कम सोचता है दूसरो के संबंध में अधिक सोचता है-मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज

मन अपने संबंध में कम सोचता है दूसरो के संबंध में अधिक सोचता है-मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज अशोक नगर– मन अपने संबंध में कम सोचता है दूसरो के संबंध में अधिक सोचता है किसी की बुराई की बात ध्यान आते ही ऐसा डूब जाता है कि उसे ख्याल ही नहीं रहता वह है कहा क्या […]

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