मनुष्य में ही वह कला, क्षमता, शक्ति है कि वह भगवान बन सकता है-आर्यिका श्री 105 विशाश्री माताजी

मनुष्य में ही वह कला, क्षमता, शक्ति है कि वह भगवान बन सकता है-आर्यिका श्री 105 विशाश्री माताजी बड़नगर। चातुर्मास में यह मत सोचना की बहुत समय है। चातुर्मास का एक-एक पल कीमती होता है, एक भी दिन व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। चातुर्मास का समय ऐसे ही निकल जाएगा और माताजी का गमन हो जाएगा। […]

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