मनुष्य भव ही श्रेष्ठ है मात्र मनुष्य गति में ही प्राणी संयम धारण कर सकता है वर्धमानसागर महाराज

मनुष्य भव ही श्रेष्ठ है मात्र मनुष्य गति में ही प्राणी संयम धारण कर सकता है वर्धमानसागर महाराज पारसोला पंचम पट्टाघीश आचार्य वर्धमानसागर जी धरियावद के पारसोला कस्बे में‌ संघ सहित वर्षायोग हेतु विराजित है आज की धर्म सभा में आचार्य श्री ने मोक्ष मार्ग कैसे प्राप्त किया जाता है, चारों गति में कौन सी […]

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