मनुष्य के अंदर जैसे भाव होते हैं वैसी उसकी सोच बनती है जैसी उसकी सोच बनती है,वैसी उसकी प्रवृत्ति होती जाती है प्रमाण सागर महाराज
मनुष्य के अंदर जैसे भाव होते हैं वैसी उसकी सोच बनती है जैसी उसकी सोच बनती है,वैसी उसकी प्रवृत्ति होती जाती है प्रमाण सागर महाराज भोपाल “मनुष्य के अंदर जैसे भाव होते है वैसी उसकी सोच बनती है,जैसी उसकी सोच बनती है वैसी उसकी प्रवृत्ति हो जाती है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने […]
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