भावों की निर्मलता पूर्वक की गई पूजन गुरु भक्ति से आत्मा से कर्म दूर होते हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

भावों की निर्मलता पूर्वक की गई पूजन गुरु भक्ति से आत्मा से कर्म दूर होते हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी धारियावद प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिवसागर जी महाराज का 57 वा अंतरविलय समाधि वर्ष तथा आचार्यकल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज का अवतरण दिवस पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री […]

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