भावनायोग” अंतस की शुद्धि का विज्ञान है- मुनि श्री प्रमाण सागर
“भावनायोग” अंतस की शुद्धि का विज्ञान है- मुनि श्री प्रमाण सागर भोपाल (अवधपुरी) भावना अर्थात हमारे मन में उठने वाले सूक्ष्मस्पंदन,हमारे चित्त की वृतियाँ,हमारे राग- द्वैष, हर्ष- विषाद रूपी भावनाए ही हमारे जीवन की दिशा और दशा को तय करती है,जब भावनायें अशुद्ध होती है,तो क्रोध,मान,माया,लोभ,ईर्ष्या,और द्वैष से कलुषित होती है तो जीवन एक अंतहीन […]
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