प्राप्त को पर्याप्त मान लोगे तो राग द्वेष से बच जाओगे प्रमाण सागर महाराज
प्राप्त को पर्याप्त मान लोगे तो राग द्वेष से बच जाओगे प्रमाण सागर महाराज इंदौर सारा संसार कर्म की मुट्ठी में है”तुम्हारी मुटठी में कुछ भी नहीं””जीवन” क्या है? पानी की बूंद के समान, उसके लिये इतना अधिक तामझाम क्यों?जब एक श्वांस पर भी तुम्हारा अधिकार नहीं,सुख दुःख,संयोग वियोग,मानअपमान,अनुकूल-प्रतिकूल संयोग सभी कर्माधीन है,तो उसे स्वीकार […]
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