निर्दोष, निर्विकल्प, निर्विकार, निष्कलंक भाव वात्सल्य है। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
निर्दोष, निर्विकल्प, निर्विकार, निष्कलंक भाव वात्सल्य है। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज रामगंजमंडी परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने वात्सल्य अंग पर विशेष प्रकाश डाला उन्होंने कहा दूध को किसी भी बर्तन में रख दो सोने के में रख दो चांदी के में रख दो, लेकिन दूध नहीं बदलेगा दूध तो दूध […]
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