निमित्त

निमित्त जिनेद्र वर्णी ने अंत समय मे आचार्य महाराज को अपना गुरु मानकर उनके श्रीचरणों मे समाधी के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था सल्लेख़ना अभी प्रारम्भ नहीं हुयी थी इससे पुर्व एक दिन अचानक संघ सहित आचार्य महाराज बिना कुछ कहे इसरी से नीमिया घाट होकर पार्श्वनाथ टोक की वंदना करने. को निकल […]

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