धर्म कार्य हो या अर्थाजन पुरूषार्थ सबमें जरूरी: आचार्यश्री वर्धमानसागरजी

धर्म कार्य हो या अर्थाजन पुरूषार्थ सबमें जरूरी: आचार्यश्री वर्धमानसागरजी उदयपुर हूमड भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रात: कालीन धर्म सभा में उपस्थित श्रावकों से जीवन में किए जाने वाले विभिन्न पुरुषार्थों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि धर्म पुरुषार्थ को इसलिए बड़ा माना गया है क्योंकि धर्म […]

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