दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी। 

दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी।  ऋषभदेव।पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्री ऋषभदेव केसरिया जी में विराजित हैं।शोक दुःख किन कारणों से होता है इसकी विवेचना में आचार्य श्री ने बताया जो मनुष् शोकसे दग्ध […]

Read More

दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता है मुनिश्री प्रणीत सागर महाराज

दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता है मुनिश्री प्रणीत सागर महाराज इंदौर जो मनुष्य शोक से दग्ध हुए मनुष्यों को देखकर संतुष्ट होता है, अथवा जो मनुष्य किसी द्वेष बुद्धि से अन्य जीवों को दुःख देता है, अथवा जो मनुष्य अपने हृदय में किसीके […]

Read More