दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी।
दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी। ऋषभदेव।पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्री ऋषभदेव केसरिया जी में विराजित हैं।शोक दुःख किन कारणों से होता है इसकी विवेचना में आचार्य श्री ने बताया जो मनुष् शोकसे दग्ध […]
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