दीक्षार्थी ने कर पात्र में आहार लेकर गणघर विधान की पूजन की ।वास्तविक घर सिद्धालय की प्राप्ति रत्नत्रय धर्म संयम साधना से प्राप्त होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

दीक्षार्थी ने कर पात्र में आहार लेकर गणघर विधान की पूजन की ।वास्तविक घर सिद्धालय की प्राप्ति रत्नत्रय धर्म संयम साधना से प्राप्त होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी धरियावद। तीर्थंकरों के श्रीमुख की देशना श्रीमद जिनवाणी हैं यह पुण्य से प्राप्त होती है पुण्य के संयोग के साथ अनेक योग मिल जाते हैं […]

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