दसलक्षण महापर्व में भावों की विशुद्धि हो न कि कषायों का बन्ध संजय जैन बड़जात्या कामां

दसलक्षण महापर्व में भावों की विशुद्धि हो न कि कषायों का बन्ध संजय जैन बड़जात्या कामां टाइटल पढ़कर आप चौंक गए होंगे लेकिन वास्तविक रूप से यह सत्य है आइए कुछ चर्चा करते हैं। क्षमा से प्रारंभ होकर क्षमापना पर समाप्त होने वाले महापर्व दस लक्षण की अग्रिम शुभकामनाएं/बधाई।     वैसे तो यह पर्व […]

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