अन्तर्मना उवाच* (25 मई!)*जिन्दगी अगर समझ ना आई, तो मेले में अकेला..*अगर जिन्दगी समझ आ गई, तो अकेले में मेला..!
अन्तर्मना उवाच* (25 मई!)*जिन्दगी अगर समझ ना आई, तो मेले में अकेला..*अगर जिन्दगी समझ आ गई, तो अकेले में मेला..!* *जिन्होंने जो भी पाया, वो वन में जाकर ही पाया।* कुन्दकुन्द स्वामी ने कहा है — कि *जो एक को जानता है, वो सब को जान लेता है। और जो सबको जानता है, […]
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