ज्यादा सोचना भी एक जहर है, जीने के लिए..क्योंकि बहुत मुश्किल है मरने तक, जिन्दा रहने के लिए..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज/
ज्यादा सोचना भी एक जहर है, जीने के लिए..क्योंकि बहुत मुश्किल है मरने तक, जिन्दा रहने के लिए..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज/ कुलचाराम हैदराबाद ज्यादा सोचना भी एक जहर है, जीने के लिए. क्योंकि बहुत मुश्किल है मरने तक, जिन्दा रहने के लिए..!आदमी अपने मन और बुद्धि के कारण से ही परेशान और दु:खी है। […]
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