ज्ञान और क्रिया की मैत्री होंना आवश्यक है विनम्र सागर महाराज

ज्ञान और क्रिया की मैत्री होंना आवश्यक है विनम्र सागर महाराज विदिशा मानव के शरीर में समय समय पर सात्विक ऊर्जा की उत्पत्ति होती रहती है,जो लोग उस सात्विक ऊर्जा का उपयोग कर लेते है वह अपने जीवन को धन्य कर लेते है”     यह उदगार समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक […]

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