8 कर्मों के नष्ट होने पर अनंत दर्शन, ज्ञान,सुख और वीर्य आदि 8 गुण प्रगट होते हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
8 कर्मों के नष्ट होने पर अनंत दर्शन, ज्ञान,सुख और वीर्य आदि 8 गुण प्रगट होते हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी जावद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित जावद विराजित है उपदेश में बताया कि संसारी प्राणी चार प्रकार की संज्ञाओं से ग्रसित होकर शाश्वत ज्ञान से विमुख है ,ज्ञान आत्मा का स्वभाव […]
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