8 कर्मों के नष्ट होने पर अनंत दर्शन, ज्ञान,सुख और वीर्य आदि 8 गुण प्रगट होते हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

8 कर्मों के नष्ट होने पर अनंत दर्शन, ज्ञान,सुख और वीर्य आदि 8 गुण प्रगट होते हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी जावद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित जावद विराजित है  उपदेश में बताया कि संसारी प्राणी चार प्रकार की संज्ञाओं से ग्रसित होकर शाश्वत ज्ञान से विमुख है ,ज्ञान आत्मा का स्वभाव […]

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ज्ञान ,चारित्र के साथ संयम धारण करके कषाय और शरीर को क्रश कर संलेखना धारण करने से मनुष्य जीवन सार्थक होता है——-आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

ज्ञान ,चारित्र के साथ संयम धारण करके कषाय और शरीर को क्रश कर संलेखना धारण करने से मनुष्य जीवन सार्थक होता है——-आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा वर्तमान में तीर्थंकरों का जिन शासन चल रहा है इसमें जीव अपना कल्याण कर सकते हैं श्रावक को श्रद्धावान ,विवेकवान और क्रियावान होना चाहिए। ऐसे श्रावक देव शास्त्र […]

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धर्म पात्र महाव्रती को आहार ,ज्ञान, अभय और औषधि दान उत्तम श्रेष्ठ दान होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म पात्र महाव्रती को आहार ,ज्ञान, अभय और औषधि दान उत्तम श्रेष्ठ दान होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री ऋषभ देव केशरिया जी कर्मोदयाद्देव धनेन हीनः । कस्मात्प्रभोऽयं भवतीह जीवः ।।यह संसारी जीव किस कर्मके उदयसे व कैसे काम करनेसे धनहीन होता है?व्ययं सुपात्रे न धनस्य कृत्वा, हठाद्धनं यश्च परस्य हृत्वा । तुष्येत्परं वा […]

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