जो परम मुनि इच्छाओं को रोककर और वैराग्य रूप विचारधारा से युक्त होकर आचरण करता है उसको शौच धर्म होता है। प्रज्ञासागर महाराज

जो परम मुनि इच्छाओं को रोककर और वैराग्य रूप विचारधारा से युक्त होकर आचरण करता है उसको शौच धर्म होता है। प्रज्ञासागर महाराज झालरापाटन। दिगंबर जैन समाज के 10 लक्षण पर्व के चौथे दिन बुधवार को उत्तम शौच धर्म को अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की गई। दिगंबर जैन समाज के सभी मंदिरों में सुबह […]

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