अन्तर्मना उवाच* *वक्त का पासा, कभी भी पलट सकता है..इसलिए वही सितम कर, जो तू सह सके..!*

अन्तर्मना उवाच* *वक्त का पासा, कभी भी पलट सकता है..इसलिए वही सितम कर, जो तू सह सके..!* *वक्त का पासा, कभी भी पलट सकता है.. *इसलिए वही सितम कर, जो तू सह सके..!* *किसी ने हमसे पूछा-?* अहिंसा का अर्थ क्या है? *हमने कम शब्दों में कहा –* जियो और जीने दो। अर्थात *खुद भी […]

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