जैन संस्कृति गुणग्राही संस्कृति है विनम्र सागर महाराज
जैन संस्कृति गुणग्राही संस्कृति है विनम्र सागर महाराज विदिशा “जैन संस्कृति गुणग्राही संस्कृति है” इस संस्कृति में अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय और लोक में स्थापित सभी साधुओं को उनके गुणों के आधार पर नमस्कार किया है, साथ ही साथ आचार्यों ने उस निकृष्ट जीव सुअर को भी कर्म की निर्जरा का कारण बताते हुये उच्च […]
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