गुणहीन व्यक्ति यदि गुणवानों से प्रशंसा सुनकर आनंदित होता है तो वह लूला लंगड़ा, अंधा और बहरा होता है : निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज
गुणहीन व्यक्ति यदि गुणवानों से प्रशंसा सुनकर आनंदित होता है तो वह लूला लंगड़ा, अंधा और बहरा होता है : निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज सागर भाग्योदय तीर्थ पर अपने मंगल प्रवचन देते हुए निर्यापक श्रमण सुधा सागर जी ने कहा की हम पुण्यात्मा है हम शक्तिमान है, हम साधु है, हम भगवान […]
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