क्षमा अपनी है और क्रोध पराया हैआचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज

क्षमा अपनी है और क्रोध पराया हैआचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज चंडीगढ़ अपने स्वभाव में रहना धर्म है जिस प्रकार हम अपनी वस्तु या व्यक्ति को खुद से दूर नही जाने देते उसी प्रकार क्षमा अपनी है उसे कहीं से लाया नही जाता यह सदैव से अपने पास ही है पराया तो क्रोध […]

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