कई वर्षों के संचित पुण्य से दीक्षा लेने के भाव परिणाम होते हैं दीक्षार्थी शकुंतला जी

कई वर्षों के संचित पुण्य से दीक्षा लेने के भाव परिणाम होते हैं दीक्षार्थी शकुंतला जी धरियावद।  हमारे विगत वर्षों में संचित पुण्य के कारण दीक्षा लेने के भाव हुए । पतिदेव ने भी दीक्षा ली आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 7 प्रतिमा के व्रत नियम अंगीकार किया ।दीक्षा के समय में सभी को […]

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