ईर्ष्या वह अग्नि है जो स्व पर को जलाकर भस्म कर देती है विशुद्ध सागर महाराज

ईर्ष्या वह अग्नि है जो स्व पर को जलाकर भस्म कर देती है विशुद्ध सागर महाराज उज्जैन ईर्ष्या वह अग्नि है जो स्व पर को जलाकर भस्म कर देती है। ईर्ष्यालु को गुणियों में भी गुण दिखाई नहीं देते। ईर्ष्यालु दूसरों की उन्नति को देख ही नहीं पाता है। सुखद जीवन जीना है, तो ईर्ष्या […]

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