त्याग से मिलता है आत्मकल्याण, इच्छाओं का अंत ही सच्चे संतोष का आरंभ : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज

त्याग से मिलता है आत्मकल्याण, इच्छाओं का अंत ही सच्चे संतोष का आरंभ : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज रत्नकरण्ड श्रावकाचार का दिव्य संदेश: ‘छोड़ोगे तभी पाओगे’, वैराग्य ही मोक्ष का वास्तविक मार्ग कोटा, 6 अगस्त। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में परम पूज्य ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण […]

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