आत्म ज्ञानी– जो सही, श्रेष्ठ और अच्छा हो, वही चाहेगा। अहंकारी और घमंडी — जो मुझे चाहिए, बस वही श्रेष्ठ है और मंगल भी। अंतरमना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज
आत्म ज्ञानी– जो सही, श्रेष्ठ और अच्छा हो, वही चाहेगा। अहंकारी और घमंडी — जो मुझे चाहिए, बस वही श्रेष्ठ है और मंगल भी। अंतरमना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज कुलचाराम हैदराबाद / *आत्म ज्ञानी* — जो सही, श्रेष्ठ और अच्छा हो, वही चाहेगा। *अहंकारी और घमंडी* — जो मुझे चाहिए, बस वही श्रेष्ठ है और […]
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