आत्मा में रमणकरना ब्रह्मचर्य है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आत्मा में रमणकरना ब्रह्मचर्य है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी पारसोला दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य दिवस पर आचार्य श्री ने अपने धर्म देशना में बताया कि ब्रह्मचर्य अर्थात अपनी आत्मा में रमन करना ब्रह्मचर्य से आशय केवल एक इन्द्रिय पर संयम नहीं वरन पांचो इंद्रीय के जो 28 विषय हैं उसका संयम […]

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