आत्मा-अजर- अमर अविनाशी और शाश्वत है वह में हूं” यह भाव जब अंतरमन में जागता है तो भेदविज्ञान प्रकट होता है” -मुनि श्री प्रमाणसागर

“आत्मा-अजर- अमर अविनाशी और शाश्वत है वह में हूं” यह भाव जब अंतरमन में जागता है तो भेदविज्ञान प्रकट होता है” -मुनि श्री प्रमाणसागर  भोपाल(अवधपुरी) “वर्तमान युग में हर व्यक्ति भागदौड़,एवं अनावश्यक तनाव और चिंता से ग्रसित होकर जी रहा है, मन में न जाने कितने प्रकार के विचार और विकल्प रोजाना उत्पन्न होते है, […]

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