आत्मज्ञानी एक मात्र आत्महित कार्य करते हैं विशुद्ध सागर महाराज
आत्मज्ञानी एक मात्र आत्महित कार्य करते हैं विशुद्ध सागर महाराज उज्जैन दुनिया में कौन सी वस्तु सुंदर है और कौन सी वस्तु असुंदर है। न कोई वस्तु सुंदर है, जिस वस्तु या व्यक्ति सेहमारी राग की पुष्टि होती है, वह हमें प्रिय लगती है और जिससे हमारेराग की पूर्ति नहीं होती है, वह हमेंअप्रिय लगती […]
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