आगम साधु के नेत्र हैं समाज को धर्म के लिए संगठित होना बहुत जरूरी हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
आगम साधु के नेत्र हैं समाज को धर्म के लिए संगठित होना बहुत जरूरी हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक आचार्य श्री वर्धमान सागर जी चातुर्मास हेतु संघ सहित टोंक विराजित है।आज उपदेश में बताया कि साधु के नेत्र आगम है साधु को आगम अनुसार चलना चाहिए ,साधु का लक्षण परिग्रह रहित , कषाय रहित […]
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