अपने स्वभाव को प्राप्त करने का नाम ही धर्म है योगसागर महाराज

अपने स्वभाव को प्राप्त करने का नाम ही धर्म है योगसागर महाराज देवरीकला सकल दिगंबर जैन समाज आयोजित कल्पदुम महामंडल विधान मेंमंगल प्रवचन देते हुए निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर महाराज ने कहा कि हम अभी भी विभाव में जी रहे है। अपने स्वभाव को प्राप्त करने का नाम ही धर्म है। पूर्व भव में जो […]

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