रावण के पुतले नहीं, अपने भीतर के विकारों का करें दहन: मुनि श्री समतासागर महाराज**: 

*रावण के पुतले नहीं, अपने भीतर के विकारों का करें दहन: मुनि श्री समतासागर महाराज**: कुण्डलपुर(म.प्र.)। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार किसी भी द्रव्य का पूर्ण विनाश नहीं होता, बल्कि उसकी पर्यायों में निरंतर परिवर्तन होता रहता है। संसार में जन्म-मृत्यु, सुख-दुख और प्राप्ति-वियोग इसी परिवर्तन […]

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