*अन्तर्मना उवाच* (30 मई!)
*अन्तर्मना उवाच* (30 मई!) *मैं उसी का जिम्मेदार हूँ,* *जो मैने कहा है..* *उसका नहीं,* *जो तुमने समझा है..!* *तभी तो आज कल लाख रूपये वाले की पूछ ही क्या है?* महंगाई का जमाना है। महंगाई तेजी से बढ़ रही है और इस महंगाई के युग में लाख रूपये क्या मायने रखते […]
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