अन्तर्मना उवाच* (30 जून!)
*अन्तर्मना उवाच* (30 जून!) *कुछ तो है जो बदल गया है,* *शाख के पत्तों का रंग उतर गया है..* *एक वक्त था जब हर वक़्त साथ था वो मेरे,* *शायद अब वक़्त बदल गया है..!* *पहले लोग कभी-कभी बूढे़ हुआ करते थे, मगर आज कल लोग आए-दिनों बढे़ जाते हैं, समय से […]
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