अन्तर्मना उवाच* (28 मई!) अब रंग और गंध से पौष्टिकता का कोई सम्बन्ध नहीं है। अंतरमना प्रसन्नसागर महाराज 

*अन्तर्मना उवाच* (28 मई!) अब रंग और गंध से पौष्टिकता का कोई सम्बन्ध नहीं है। अंतरमना प्रसन्नसागर महाराज  *आज के आदमी की मानसिकता,* *कुछ इस तरह बन गई है कि* *भोजन का रंग और उसकी गंध अच्छी होनी चाहिये..* *बाकी दुनिया जाये………!*       अब रंग और गंध से पौष्टिकता का कोई सम्बन्ध नहीं […]

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