अन्तर्मना उवाच* (28 जुलाई!)
*अन्तर्मना उवाच* (28 जुलाई!) *दान करने से रूपया जाता है पुण्य नहीं,* *घड़ी बन्द करने से, घड़ी बन्द होती है समय नहीं,* *झूठ छुपाने से झूठ छुपता है – सच नहीं,* *क्रोध की गाँठ बुरी है, क्रोध नहीं..* *इसलिए क्रोध नरक है और क्षमा स्वर्ग-मोक्ष..!* कोई भी नरक जाना नहीं चाहता, सबकी […]
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