अन्तर्मना उवाच* (25 जुलाई!)कुलचाराम हैदराबाद अपनी अच्छाइयों पर इतना भरोसा रखो कि**जो तुम्हें खोयेगा वो यक़ीनन जिन्दगी भर रोयेगा..!*

*अन्तर्मना उवाच* (25 जुलाई!)कुलचाराम हैदराबाद अपनी अच्छाइयों पर इतना भरोसा रखो कि**जो तुम्हें खोयेगा वो यक़ीनन जिन्दगी भर रोयेगा..!* *अपनी अच्छाइयों पर इतना भरोसा रखो कि* *जो तुम्हें खोयेगा वो यक़ीनन जिन्दगी भर रोयेगा..!* *जिंदगी में तीन मित्र है –* पहला मित्र *ज्ञान,* दूसरा *धन* और तीसरा *विश्वास।* तीनों सदा एक साथ ही रहते हैं। […]

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