अन्तर्मना उवाच* (25 अप्रैल!)
*अन्तर्मना उवाच* (25 अप्रैल!) *लोग क्या कहेंगे-?* *पहले दिन हँसेंगे,* *दूसरे दिन मज़ाक बनायेंगे,* *तीसरे दिन भूल जायेंगे..!* इसलिए लोगों की परवाह मत करो। *करो वो जो उचित हो, जो तुम चाहते हो और जिसमें आपका मन शांत रहे और चेहरा मुस्कान से भरा रहे।* क्योंकि ज़िन्दगी तुम्हारी है लोगों की नहीं। *किसी […]
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