अन्तर्मना उवाच* (22 जून!)
अन्तर्मना उवाच* (22 जून!) *संसार से हमारे सम्बन्ध कैसे होने चाहिए-?* हमने कहा — *हम सब यात्री हैं, हमारे सम्बन्ध नदी नाव जैसे होने चाहिये..!* देर सवेर तो बिछड़ना ही है। *हर मिलन के क्षणों में विदाई को ना भूलें।* किसी से भी मिलो तो ध्यान रखना, कल बिछड़ना भी है। किसी से […]
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