अन्तर्मना उवाच* (17 मार्च)

*अन्तर्मना उवाच* (17 मार्च) *किसी और के जैसा होने की चाह ही हमें..* *रोज दु:ख दे रही है और व्यर्थ परेशान कर रही है..!* *भगवान महावीर कहते हैं* – सत्य केवल एक ही है और वह यह है कि मैं स्वयं के अलावा इस जगत में और कुछ भी नहीं पा सकता हूँ। *अधर्म का […]

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