अन्तर्मना उवाच* (17 जून!)

*अन्तर्मना उवाच* (17 जून!) *हमें अभी तक ये समझ नहीं आया कि शादी सुदा लोग –* *जिन्दगी से इतने परेशान रहते हैं..* *तो फिर सालगिरह इतनी धूम धाम से क्यों मनाते हैं..?*         किसी ने पूछा — *आपको वैराग्य कैसे हुआ-?* हमें समझ में नहीं आता, आपने घर परिवार देखा नहीं, शादी […]

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