अन्तर्मना उवाच (16 फरवरी!) मनुष्य की चाल दो बार बदलती है प्रसन्नसागर महाराज
अन्तर्मना उवाच (16 फरवरी!) मनुष्य की चाल दो बार बदलती है प्रसन्नसागर महाराज मनुष्य की चाल दो बार बदलती है — एक — धन बढ़ता है तो अकड़ आती है, और दो — धर्म बढ़ता है तो विनम्रता आती है। हे परमात्मा! ज़िन्दगी–भले ही तू छोटी देना, मगर ऐसी ज़िन्दगी देना कि […]
Read More