*अन्तर्मना उवाच* (15 मई!)
*अन्तर्मना उवाच* (15 मई!) *सम्मान के लिए संघर्ष करें,* *परन्तु अधर्म का साथ ना दें..* *अधिकार के लिए जरूर लडें,* *परन्तु जिस पर अधिकार नहीं..* *उसका मोह ना करें..!* क्योंकि *संसार में कोई किसी का नहीं है। सब अपने अपने स्वार्थ को लेकर तुमसे प्यार करते हैं।* संसार तभी तक मीठा […]
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