अन्तर्मना उवाच (11 फरवरी!)आदत थी हमें रिश्तों में, दुध की तरह घुल मिल जाने की..याद ही नहीं कि जमाना तो शुगर फ्री हो गया है..! प्रसन्न सागर महाराज

अन्तर्मना उवाच (11 फरवरी!)आदत थी हमें रिश्तों में, दुध की तरह घुल मिल जाने की..याद ही नहीं कि जमाना तो शुगर फ्री हो गया है..! प्रसन्न सागर महाराज     इसलिए — सन्त अपने प्रवचनों में सिद्धान्त नहीं,‌‌ श्रद्धा देता है। शास्त्र नहीं सत्य देता है। पंथ नहीं पथ देता है। ज्ञान नहीं अनुभव देता […]

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