अन्तर्मना उवाच* (08 फरवरी!) मनुष्य जीवन अति दुर्लभ है। प्रसन्न सागर महाराज

*अन्तर्मना उवाच* (08 फरवरी!) मनुष्य जीवन अति दुर्लभ है। प्रसन्न सागर महाराज ऐसा ही है जैसे कोई समुद्र में नहा रहा हो और उसके हाथ में खस-खस का एक दाना है। जैसे ही आँख में साबुन जाता है और वो खस-खस का दाना हाथ से छूट जाए। अब हम आप से कहें कि वो दाना […]

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